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उत्तर प्रदेश अब भय का नहीं, विश्वास और विकास का प्रदेश: सीएम योगी

उत्तर प्रदेश अब भय का नहीं, विश्वास और विकास का प्रदेश: सीएम योगी

लखनऊ। राज्यपाल के अभिभाषण पर शुक्रवार को विधानसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले नौ वर्षों की यात्रा अपराध और अव्यवस्था से अनुशासन की यात्रा है। कर्फ्यू से कानून के राज की यात्रा है। उपद्रव से उत्सव की यात्रा है। समस्या से समाधा

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satyakee parakh 13 फ़रवरी 2026, 19:11 IST
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उत्तर प्रदेश अब भय का नहीं, विश्वास और विकास का प्रदेश: सीएम योगी

लखनऊ। राज्यपाल के अभिभाषण पर शुक्रवार को विधानसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले नौ वर्षों की यात्रा अपराध और अव्यवस्था से अनुशासन की यात्रा है। कर्फ्यू से कानून के राज की यात्रा है। उपद्रव से उत्सव की यात्रा है। समस्या से समाधान की यात्रा है और अविश्वास से आत्मविश्वास की यात्रा है। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की उपलब्धियों, नीतिगत बदलावों और भविष्य की दिशा का व्यापक खाका प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि उत्तर प्रदेश अब भय का नहीं, विश्वास और विकास का प्रदेश है। अपराध और अव्यवस्था से अनुशासन की यात्रा केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि मानसिकता और नीतिगत प्रतिबद्धता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
विपक्ष का आचरण संवैधानिक प्रमुख और मातृशक्ति का अपमान
मुख्यमंत्री ने विपक्षी सदस्यों पर हमला बोलते हुए कहा कि वर्ष की शुरुआत में राज्यपाल का अभिभाषण सरकार की उपलब्धियों और भावी योजनाओं का आधिकारिक दस्तावेज होता है। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत सदन में आई थीं। यह कार्यक्रम अचानक तय नहीं हुआ था, बल्कि दलीय नेताओं की बैठक और कार्य मंत्रणा समिति में इस पर पहले से चर्चा हो चुकी थी। इसके बावजूद अभिभाषण के दौरान मुख्य विपक्षी दल ने जो आचरण दिखाया वह संवैधानिक प्रमुख और मातृशक्ति का अपमान है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में महिलाओं को सम्मान देने की संस्कृति रही है। उन्होंने कहा कि महर्षि वेदव्यास ने भी कहा है कि

“नास्ति मातृसमा छाया, नास्ति मातृसमा गति।
नास्ति मातृसमा त्राता, नास्ति मातृसमा प्रिया॥”

मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन परंपरा में मां या मां के समान हर महिला को सर्वोच्च सम्मान देने का विधान है, ऐसे में सदन में हुआ आचरण अनुचित था। नेता प्रतिपक्ष पर सवाल खड़े हुए करते हुए सीएम ने कहा कि संभवतः इसीलिए आप सदन में उपस्थित नहीं हुए, क्योंकि समाजवादी पार्टी के सदस्य आपके नियंत्रण से बाहर रहे होंगे। यही वह आचरण था, जिससे बिटिया घबराती थी और व्यापारी कारोबार समेटता था। मुख्यमंत्री ने विपक्ष के आड़े हाथ लेते हुए गालिब का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गालिब ने कहा था कि ‘उम्र भर मैं ये भूल करता रहा, धूल चेहरे पर थी और आईना साफ करता रहा।’ समाजवादी पार्टी के और मुख्य विपक्षी दलों के इस आचरण के कारण उत्तर प्रदेश का पूरा सदन अपने आप को आहत महसूस कर रहा था।

‘परसेप्शन’ और कानून-व्यवस्था पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की छवि अचानक खराब नहीं हुई थी, बल्कि वर्षों तक चले अव्यवस्थित आचरण और अपराध के वातावरण ने उसे प्रभावित किया था। बेटियां भयभीत थीं, व्यापारी अपना कारोबार समेटने को मजबूर थे और दंगे-कर्फ्यू आम बात थे। उन्होंने दावा किया कि 2017 के बाद से प्रदेश में “जीरो टॉलरेंस” नीति लागू की गई है। 2017 से पहले नीतिगत उदासीनता और प्रशासनिक शिथिलता का माहौल था, जबकि अब कानून का राज स्थापित हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के बाद से कोई सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ है और प्रदेश में भयमुक्त वातावरण बना है।

समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा विकास का लाभ
राज्यपाल के अभिभाषण का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले आठ वर्षों में “डबल इंजन सरकार” के प्रयासों से 6 करोड़ से अधिक लोगों को बहुआयामी गरीबी से बाहर निकाला गया है। यह आंकड़ा नीति आयोग के अनुसार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गरीबी से बाहर आने का अर्थ यह नहीं कि लाभार्थियों को अन्य योजनाओं से वंचित किया जाएगा। राशन, स्वास्थ्य, आवास, पेंशन और अन्य सुविधाएं जारी रहेंगी। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हर गरीब को पक्का घर उपलब्ध कराया जा रहा है। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा दिया जा रहा है। निःशुल्क राशन की व्यवस्था जारी है। वृद्ध, निराश्रित और दिव्यांगजन को 12,000 रुपये वार्षिक पेंशन दी जा रही है। इन योजनाओं का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है।

पुलिस सुधार और आधुनिक सुरक्षा तंत्र
मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए किए गए सुधारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पुलिस बल में बड़े पैमाने पर भर्ती की गई है। पुलिस बल में महिलाओं की संख्या 10,000 से बढ़कर आज 44,000 हो गई है। 2017 से पहले प्रशिक्षण क्षमता 3,000 थी जो अब बढ़ा दी गई है। हाल ही में 66,200 से अधिक पुलिस भर्ती की गई, जिसके सभी चयनिततों को प्रदेश में ही ट्रेनिंग दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि साइबर अपराध से निपटने के लिए प्रदेश के सभी 75 जिलों में साइबर थाने और हेल्प डेस्क स्थापित किए गए हैं। फॉरेंसिक साइंस इकोसिस्टम को मजबूत किया गया है, जिससे जांच प्रक्रिया अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी हुई है।

बीमारू से विकास की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब “बीमारू राज्य” की छवि से बाहर निकल चुका है। आज यह टेक्नोलॉजी, ट्रस्ट और ट्रांसपोर्टेशन की त्रिवेणी के रूप में उभर रहा है। पहली बार आर्थिक सर्वेक्षण को सदन में व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत किया गया, जो “विचार से व्यवस्था और व्यवस्था से विकास” की यात्रा का प्रतीक है। उन्होंने इसे अविश्वास से आत्मविश्वास की ओर बढ़ता प्रदेश बताया, जहां पहले उपद्रव की खबरें सुर्खियां बनती थीं, अब निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक कल्याण की खबरें प्रमुखता पा रही हैं।

आज ट्रिपल टी की त्रिवेणी बनकर उभरा
मुख्यमंत्री ने का कि लगभग 9 वर्ष की जो यात्रा है, ये अपराध और अव्यवस्था से अनुशासन की यात्रा है, कर्फ्यू से कानून के राज की यात्रा है, उपद्रव से उत्सव की यात्रा है, समस्या से समाधान की यात्रा है और अविश्वास से आत्मविश्वास की यात्रा है। यानी ये यात्रा केवल एक सत्ता प्राप्त करने की होड़ नहीं है, इसको प्राप्त करने के लिए सरकार की स्पष्ट नीति थी, साफ नियत थी, दृढ़ इच्छाशक्ति थी और सुशासन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हम लोगों ने जब एक सामूहिक रूप से प्रयास किया, हर व्यक्ति के मन में एक विश्वास भरा, हां यूपी भी कर सकता है, यूपी से भी परिणाम दिए जा सकते हैं और वही आज उत्तर प्रदेश के अंदर देखने को मिल रहा है। आज उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य नहीं है, आज यह ट्रिपल टी का एक प्रतीक बना है। ट्रिपल टी मतलब टेक्नोलॉजी, ट्र्स्ट और ट्रांसफॉर्मेशन। यानी इन तीनों की एक त्रिवेणी बनकर के उभरा है।

2017 के पहले केंद्र सरकार की योजनाओं का बॉटलनेक था उत्तर प्रदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहली बार सदन में प्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण भी प्रस्तुत हुआ है। डंके की चोट पर सरकार ने कहा हां हमने क्या किया है। आर्थिक सर्वेक्षण भी विचार से व्यवस्था और व्यवस्था से विकास की इस अभिनव यात्रा का प्रतीक है, जिसको उत्तर प्रदेश की जनता जी रही है। उसको अपने आचरण में होते हुए देख रही है और यह उस नए युग का उद्घोष है जो वर्षों से हर उत्तरवासी की तमन्ना थी। सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य अपनी पहचान के लिए मोहताज हो, उसको शक की निगाहों से देखा जाए, यही तो हुआ था। उत्तर प्रदेश के नौजवानों के सामने पहचान का संकट खड़ा हुआ था। केंद्र सरकार की योजनाओं का बॉटलनेक कोई माना जाता था तो वह उत्तर प्रदेश था। उत्तर प्रदेश ने आज उससे उबर कर विकास की एक दिशा तय करने वाले अग्रणी राज्यों में आज अपनी पहचान बनाई है।

आज उत्तर प्रदेश भारत के विकास का अग्रिम इंजन बनकर उसे लीड कर रहा
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज यूपी देश की टॉप-3 अर्थव्यवस्था में से एक है। अब यूपी को कोई बीमारू नहीं कहता है। अब उत्तर प्रदेश भारत की इकोनॉमी का एक ब्रेकथ्रू बना है। भारत के विकास का अग्रिम इंजन बनकर के उसको लीड कर रहा है। 2017 के पहले जो नीतिगत उदासीनता थी, प्रशासनिक शिथिलता थी और विकास विरोधी सोच थी, इससे उबरकर के प्रदेश ने पिछले 9 वर्ष में अनुशासन को, एक सुदृढ़ नेतृत्व को और स्पष्ट शासन दृष्टि के साथ विकास की अपनी एक नई परिभाषा गढ़ी है। एक नई परिभाषा के रूप में आज उत्तर प्रदेश आगे बढ़ा है और आज इसी का परिणाम है कि जो ये आर्थिक सर्वेक्षण आया है। ये सरकार की वेलफेयर स्कीम के माध्यम से जो कार्य हो रहे हैं, जो रोजगार के सृजन हुए हैं, जो निवेश का विस्तार हुआ है, सामाजिक सुरक्षा के माध्यम से प्रदेश के अंदर प्रत्येक नागरिक को बिना भेदभाव के एक सशक्त, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने के निर्णायक कदम उठाए हैं, उसका परिणाम हम सबके सामने उस रूप में आज देखने को मिल रहे हैं।
सीएम ने सार्थक बहस को लोकतंत्र की शक्ति बताया
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्यपाल के अभिभाषण पर कुल 92 सदस्यों ने चर्चा में हिस्सा लिया, जिनमें 60 सत्ता पक्ष और 32 विपक्ष के सदस्य थे। उन्होंने इसे संविधान की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि विधायिका के मंच से वर्ष की शुरुआत करना लोकतांत्रिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विपक्ष ने अपनी बात रखी, सत्ता पक्ष ने अपना पक्ष रखा, लेकिन सभी ने चर्चा में भागीदारी की, यह स्वस्थ लोकतंत्र का संकेत है। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से दलीय नेताओं की भूमिका की सराहना की और चर्चा की गरिमा बनाए रखने के लिए सभी माननीय सदस्यों का अभिनंदन किया।

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satyakee parakh संपादक

सत्य की परख — लखनऊ से समाचार।

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