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रोल मॉडल बना यूपी का सोलर मॉडल, सीख रहे देश के अन्य राज्य

रोल मॉडल बना यूपी का सोलर मॉडल, सीख रहे देश के अन्य राज्य

*लखनऊ, 10 जनवरी।* उत्तर प्रदेश ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में ऐसा इतिहास रचा है, जिसकी गूंज न केवल पूरे देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा मंचों पर भी सुनाई दे रही है। प्रधानमंत्री पीएम सूर्य घर योजना के अंतर्गत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल मार्गदर्शन में प्रदेश ने रूफटॉप सोलर ऊर्जा को ज

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satyakee parakh 10 जनवरी 2026, 17:26 IST
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रोल मॉडल बना यूपी का सोलर मॉडल, सीख रहे देश के अन्य राज्य

*लखनऊ, 10 जनवरी।* उत्तर प्रदेश ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में ऐसा इतिहास रचा है, जिसकी गूंज न केवल पूरे देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा मंचों पर भी सुनाई दे रही है। प्रधानमंत्री पीएम सूर्य घर योजना के अंतर्गत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल मार्गदर्शन में प्रदेश ने रूफटॉप सोलर ऊर्जा को जनआंदोलन का रूप दे दिया है। यूपी का सोलर मॉडल आज अन्य राज्यों के लिए रोल मॉडल बन गया है और इसकी कार्यप्रणाली का अध्ययन कर कई राज्य अपने यहां इसी तर्ज पर व्यवस्था लागू कर रहे हैं। बिहार और असम की मांग पर प्रदेश के सोलर एक्सपर्ट उनके यहां जाकर उन्हें यूपी के सोलर मॉडल की जानकारी दे रहे हैं।

*कई राज्य कर रहे अध्ययन*
उत्तर प्रदेश नवीन एवं अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (यूपीनेडा) के एमडी एवं निदेशक इंद्रजीत सिंह ने बताया कि बिहार और असम को यूपी के सोलर मॉडल पर प्रशिक्षण एवं प्रस्तुतीकरण भी दिया गया है। कई अन्य राज्यों ने भी यूपी के सोलर मॉडल का अध्ययन करने की इच्छा जाहिर की है। उन्होंने बताया कि आज उत्तर प्रदेश में गांव–शहर की छतों पर चमकते सोलर पैनल केवल बिजली नहीं पैदा कर रहे, बल्कि नई उम्मीद, नई अर्थव्यवस्था और नया हरित उत्तर प्रदेश गढ़ रहे हैं। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश का मॉडल अब पूरे देश में सफलता की केस-स्टडी के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।

*प्रदेश की ऊर्जा स्वावलंबन की दिशा में ऐतिहासिक कदम*
प्रदेश में अब तक रूफ टाप सोलर संयत्र के लिए 10,43,102 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 3,34,084 घरों पर रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित हो चुके हैं। कुल 1,148.56 मेगावॉट की सोलर क्षमता विकसित होने से प्रदेश ने ऊर्जा स्वावलंबन की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार द्वारा 2,285.46 करोड़ रुपये सब्सिडी और राज्य सरकार द्वारा लगभग 600 करोड़ रुपये अतिरिक्त सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के खातों में डीबीटी के माध्यम से प्रदान की गई है।

*एक ही दिन में 1,868 रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन का बनाया विश्व रिकॉर्ड*
उन्होंने बताया कि दिसंबर 2025 में उत्तर प्रदेश ने रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापना में नया कीर्तिमान स्थापित किया। महीने भर में 31,165 रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाए गए, जिससे यूपी ने देश में दूसरा स्थान हासिल किया। इससे भी बड़ी उपलब्धि यह रही कि एक ही दिन में 1,868 इंस्टॉलेशन कर प्रदेश ने विश्व रिकॉर्ड बनाया। यह उपलब्धि तब दर्ज की गई जब अधिकांश क्षेत्रों में घना कोहरा, कड़ाके की ठंड और सीमित कार्य घंटे जैसी प्रतिकूल परिस्थितियां थीं। इन चुनौतियों के बावजूद जिला प्रशासन, ऊर्जा विभाग, बैंकिंग संस्थान और सोलर वेंडर्स के समन्वय ने इसे संभव बनाया।

*हर वर्ष 188 करोड़ यूनिट स्वच्छ बिजली, 1,225 करोड़ रुपये की बचत*
ऊर्जा विशेषज्ञों का आंकलन है कि स्थापित रूफटॉप सोलर क्षमता से प्रतिवर्ष 188 करोड़ यूनिट से अधिक स्वच्छ बिजली का उत्पादन हो रहा है। यह उत्पादन कई मध्यम आकार के ताप विद्युत संयंत्रों के बराबर है। इससे लगभग 30–35 लाख शहरी परिवारों की वार्षिक बिजली आवश्यकता पूरी की जा सकती है। यदि 6.5 रुपये प्रति यूनिट की दर से आकलन किया जाए तो उपभोक्ताओं को हर वर्ष 1,225.63 करोड़ रुपये से अधिक की सामूहिक बचत हो रही है। औसत 3 किलोवाट संयंत्र से ही एक परिवार को 27–30 हजार रुपये वार्षिक बचत मिल रही है, जिससे मध्यम वर्ग की आर्थिक स्थिरता मजबूत हुई है।

*रोजगार, उद्योग और हरित अर्थव्यवस्था को मिला नया संबल*
रूफटॉप सोलर क्षेत्र श्रम-प्रधान होने के कारण स्थापित सौर क्षमता से अनुमानतः 1.25 लाख से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं। तकनीशियन, इलेक्ट्रिशियन, सिविल वर्कर, ओएंडएम कर्मी, लॉजिस्टिक्स और सोलर वेंडर्स से जुड़े युवाओं को बड़े पैमाने पर अवसर मिला है। लगभग 2,800 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी ने केवल उपभोक्ताओं को राहत नहीं दी, बल्कि सोलर मॉड्यूल, इन्वर्टर, केबल, माउंटिंग स्ट्रक्चर से जुड़े उद्योगों को नई गति प्रदान की है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि सोलर सब्सिडी पर खर्च किया गया प्रत्येक एक रुपया ढाई से तीन रुपये तक की अतिरिक्त आर्थिक गतिविधि उत्पन्न कर रहा है।

*तकनीकी नवाचार और हरित वित्तीय भविष्य की दिशा में कदम*
नवीन ऊर्जा विशेषज्ञ उपकारी नाथ के अनुसार यूनिफाइड एनर्जी इंटरफेस (UEI) के माध्यम से सोलर से उत्पादित अतिरिक्त बिजली का डिजिटल लेखा-जोखा तैयार किया जाएगा। इससे भविष्य में पीयर-टू-पीयर एनर्जी ट्रेडिंग, सोलर कॉइन और सोलर रुपया जैसी अवधारणाओं के क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त होगा। यह प्रणाली उद्योगों को हरित ऊर्जा से जोड़ने में सहायक होगी तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों जैसे कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) के अनुरूप उत्पादन को प्रोत्साहित करेगी।

*पर्यावरणीय लाभ: 16.5 लाख मीट्रिक टन CO₂ उत्सर्जन में कमी*
स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के परिणामस्वरूप हर वर्ष 16.5 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आ रही है। यह कमी करोड़ों पेड़ लगाने के बराबर पर्यावरणीय लाभ प्रदान करती है। इससे उत्तर प्रदेश के नेट-जीरो लक्ष्य एवं जलवायु प्रतिबद्धताओं को मजबूत सहारा मिला है। ग्रामीण इलाकों में सोलर पैनलों से न केवल बिजली की उपलब्धता बढ़ी है, बल्कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता की सोच भी विकसित हुई है।

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satyakee parakh संपादक

सत्य की परख — लखनऊ से समाचार।

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