
लखनऊ। ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में “तीसरे लिंग की हाशिए से मुख्य धारा तक की यात्रा” विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का शुभारंभ बुधवार को हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने किया।
कार्यक्रम में स्वागत भाषण विधि विभागाध्यक्ष डॉ. पीयूष त्रिवेदी ने दिया। मुख्य अतिथि के रूप में किन्नर समाज की प्रमुख नेतृत्वकर्ता तथा उज्जैन पीठ जूना अखाड़ा की महामंडलेश्वर मां पवित्रा उपस्थित रहीं। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा तृतीय लिंग जैसे संवेदनशील विषय पर सेमिनार आयोजित करने की सराहना करते हुए समाज से सकारात्मक सोच अपनाने की अपील की।
मुख्य वक्ता के रूप में साहित्यकार एवं आकाशवाणी गोरखपुर की पूर्व निदेशक डॉ. नीरजा माधव ने अपने उपन्यास ‘मुख्ता यमदीप’ एवं अन्य साहित्यिक रचनाओं के माध्यम से तृतीय लिंग से जुड़े सामाजिक पहलुओं पर प्रकाश डाला।
विशिष्ट अतिथि के रूप में फिनलैंड के देवऑप्स इंजीनियर एवं पर्वतारोही अवनीश चंदेल उपस्थित रहे। वहीं, भटिंडा केंद्रीय विश्वविद्यालय के विधि संकायाध्यक्ष प्रो. दीपक सिंह तथा बाबा भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय की मानव अधिकार विभागाध्यक्ष प्रो. प्रीति मिश्रा ने तृतीय लिंग के अधिकारों और सामाजिक समावेशन पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम के समापन सत्र में सह-समन्वयक एवं असिस्टेंट प्रोफेसर अंशुल पांडेय ने उच्चतम न्यायालय के निर्देशों तथा भारत सरकार द्वारा तृतीय लिंग समुदाय के हित में किए गए प्रयासों की जानकारी दी और सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का संचालन एलएलएम के छात्र अमन कुमार त्रिपाठी एवं अस्मिता मिश्रा ने किया।
इस अवसर पर कुलानुशासक डॉ. नीरज शुक्ला, विधि संकायाध्यक्ष प्रो. मसूद आलम, समन्वयक डॉ. श्वेता त्रिवेदी सहित डॉ. दीक्षा मिश्रा, तान्या सागर, डॉ. प्रशांत वरुण, डॉ. आशीष शाही, डॉ. कृष्ण मुकुंद, निधि सिंह राठौड़, हेमा पाठक, नलिनी मिश्रा, डॉ. राजकुमार सिंह, डॉ. योगेंद्र सिंह सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।



