
*लखनऊ, 11 फरवरी।* उत्तर प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बुधवार को विधानसभा में योगी सरकार का वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत किया। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत बजट का कुल आकार 9,12,696.35 करोड़ रुपये है, जो वित्तीय वर्ष 2025-26 की तुलना में लगभग 12.9 प्रतिशत अधिक है। इस लिहाज से योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में उत्तर प्रदेश का अब तक का सबसे बड़ा बजट प्रस्तुत किया है। वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सदन को बताया कि यह बजट राज्य की बढ़ती आर्थिक क्षमता, निवेश के अनुकूल माहौल और सुदृढ़ राजकोषीय प्रबंधन का परिणाम है। यह बजट न केवल राज्य की आर्थिक मजबूती को दर्शाता है, बल्कि दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता और सतत विकास की स्पष्ट रूपरेखा भी प्रस्तुत करता है। बजट 2026-27 योगी सरकार की उस सोच को प्रतिबिंबित करता है, जिसमें विकास, वित्तीय अनुशासन और भविष्य की तैयारी तीनों को समान महत्व दिया गया है।
*शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि को प्राथमिकता*
वित्त मंत्री ने बताया कि बजट में 19.5 प्रतिशत पूंजीगत परिव्यय का प्रावधान किया गया है, जो आधारभूत ढांचे, औद्योगिक विकास, सड़क, ऊर्जा और शहरी-ग्रामीण अधोसंरचना को नई गति देगा। पूंजीगत निवेश से रोजगार सृजन होगा और आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी। योगी सरकार ने सामाजिक क्षेत्रों को बजट में प्रमुख स्थान दिया है। इसके अंतर्गत शिक्षा के लिए कुल बजट का 12.4 प्रतिशत, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा के लिए 6 प्रतिशत और कृषि एवं सम्बद्ध सेवाओं के लिए 9 प्रतिशत का आवंटन किया गया है। यह स्पष्ट संकेत है कि सरकार मानव संसाधन विकास और किसानों की आय बढ़ाने को विकास की धुरी मानकर चल रही है।
*राजकोषीय घाटा 3 प्रतिशत की सीमा में*
उन्होंने बताया कि 16वें केन्द्रीय वित्त आयोग की संस्तुतियों के अनुरूप वित्तीय वर्ष 2026-27 में राजकोषीय घाटे की सीमा 3 प्रतिशत निर्धारित की गई है, जो वर्ष 2030-31 तक लागू रहेगी। सरकार ने स्पष्ट किया कि वह राजकोषीय अनुशासन से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करेगी। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा 1,18,480.59 करोड़ रुपये अनुमानित है, जो राज्य के अनुमानित सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 2.98 प्रतिशत है। यह 3 प्रतिशत की निर्धारित सीमा के भीतर है और वित्तीय अनुशासन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। समग्र परिप्रेक्ष्य में, बजट 2026-27 में एक ओर जहां विकासोन्मुख नई योजनाओं का विस्तार है, वहीं दूसरी ओर राजस्व बचत और नियंत्रित राजकोषीय घाटे के माध्यम से वित्तीय स्थिरता बनाए रखने का स्पष्ट प्रयास किया गया है।
*ऋण प्रबंधन में योगी सरकार की बड़ी उपलब्धि*
वित्त मंत्री ने बताया कि वर्ष 2016-17 में राज्य को 29.3 प्रतिशत ऋण-जीएसडीपी की अर्थव्यवस्था विरासत में मिली थी, जिसे 2019-20 तक घटाकर 27.9 प्रतिशत कर दिया गया। हालांकि कोविड-19 महामारी के कारण यह अनुपात वर्ष 2021-22 में बढ़कर 33.4 प्रतिशत हो गया था, लेकिन सुनियोजित राजकोषीय प्रबंधन के चलते वर्ष 2024-25 में इसे पुनः 27 प्रतिशत से नीचे लाया गया है। सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में ऋण-जीएसडीपी अनुपात को 23.1 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य तय किया है। इतना ही नहीं, बजट के साथ प्रस्तुत मध्यकालीन राजकोषीय नीति में इसे चरणबद्ध रूप से 20 प्रतिशत से नीचे लाने का संकल्प भी दोहराया गया है। इसका उद्देश्य राज्य की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता और सतत विकास सुनिश्चित करना है।
*नई योजनाओं और सुदृढ़ वित्तीय संरचना की दिशा में बड़ा कदम*
योगी सरकार ने अपने बजट में 43,565.33 करोड़ रुपये की नई योजनाओं को शामिल किया है, जिनका उद्देश्य अधोसंरचना विकास, सामाजिक क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण और उत्पादक निवेश को गति देना है। यह प्रावधान राज्य की दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि और समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राज्य की कुल प्राप्तियां 8,48,233.18 करोड़ रुपये अनुमानित की गई हैं। इसमें से राजस्व प्राप्तियां 7,28,928.12 करोड़ रुपये तथा पूंजीगत प्राप्तियां 1,19,305.06 करोड़ रुपये निर्धारित हैं। राजस्व प्राप्तियों में कर राजस्व का बड़ा हिस्सा 6,03,401.76 करोड़ रुपये है। इसमें स्वयं का कर राजस्व 3,34,491 करोड़ रुपये तथा केन्द्रीय करों में राज्य का अंश 2,68,910.76 करोड़ रुपये शामिल है। यह वित्तीय संरचना स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि राज्य की आय में स्वयं के संसाधनों की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है, जिससे राज्य आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर और सशक्त बनता जा रहा है।
*पूंजीगत निवेश पर स्पष्ट बल*
राज्य सरकार ने कुल 9,12,696.35 करोड़ रुपये के व्यय का प्रस्ताव रखा है, जिसमें पूंजीगत निवेश को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इसमें से 6,64,470.55 करोड़ रुपये राजस्व लेखा व्यय तथा 2,48,225.81 करोड़ रुपये पूंजी लेखा व्यय के रूप में निर्धारित किए गए हैं। पूंजीगत व्यय का यह उच्च स्तर राज्य में दीर्घकालिक परिसंपत्तियों के निर्माण, आधारभूत संरचना के विस्तार और आर्थिक गतिविधियों को गति देने की स्पष्ट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वित्त मंत्री ने बताया कि समेकित निधि की प्राप्तियों में से कुल व्यय घटाने पर 64,463.17 करोड़ रुपये का घाटा अनुमानित है। वहीं लोक लेखे से 9,500 करोड़ रुपये की शुद्ध प्राप्तियां अनुमानित की गई हैं। इन दोनों को समायोजित करने पर समस्त लेन-देन का शुद्ध परिणाम 54,963.17 करोड़ रुपये ऋणात्मक आंका गया है, जो वित्तीय प्रबंधन के संतुलन की आवश्यकता को इंगित करता है। वित्त मंत्री ने बताया कि प्रारंभिक शेष 96.41 करोड़ रुपये ऋणात्मक को जोड़ने पर अंतिम शेष 55,059.58 करोड़ रुपये ऋणात्मक अनुमानित है। एक सकारात्मक संकेत यह भी है कि राजस्व बचत 64,457.57 करोड़ रुपये अनुमानित की गई है, जो दर्शाता है कि राज्य की नियमित आय उसके नियमित व्यय से अधिक है और राजकोषीय संतुलन को बनाए रखने में सहायता कर रही है।



